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सोमवार, जनवरी 3
लगन एक की भीतर गहरी
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लगन एक की भीतर गहरी काँव-काँव कौवे की दिन भर मगर कोकिला सुबह साँझ ही, बगुले बन बन डोला करते राजहंस तिरते कैलास ही ! सारहीन से भरा है यह ज...
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