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मंगलवार, मई 3
आज खिले कल मुरझाएंगे
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आज खिले कल मुरझाएंगे पल-पल हाँ से नहीं हो रहे छिन-छिन हम तुम शेष हो रहे, चुक जाना है नियति अपनी थम जायेगी गति जीवन की ! काल सिंधु में बह...
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