मन पाए विश्राम जहाँ

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मंगलवार, फ़रवरी 1

कर्म से कर्मयोग

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कर्म से कर्मयोग चींटी से हाथी तक राजा से रंक तक, मूर्ख से विद्वान तक सभी रत हैं कर्म में ! श्वास लेते, उठते, बैठते रोते-हँसते, चलते-फिरते,...
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बुधवार, जनवरी 12

गति वैसी होनी जानी है !

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गति वैसी होनी जानी है ! कर्मों की गति अटल बड़ी है लेकिन सीधी, सरल, सही है, जैसा भाव, कर्म, वाणी है गति वैसी होनी जानी है ! शुभ कर्मों से पु...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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