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मंगलवार, अप्रैल 5
या रब
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या रब या रब हो मेरे दिल का इतना बड़ा मकां दुनिया के सब गमों को उसमें पनाह मिले ! बरसें मेरे आंगन में चाहे न बदलियाँ सरहद के उस पार पर पानी ...
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