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गुरुवार, फ़रवरी 10

हँसना मना है

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  ए जी,खायेंगे न ? “ए जी, चलेंगे न” की जब श्रीमती ने लगाई पांचवी बार गुहार तो झकमार, जूता पहन, श्रीमान हो गए सांध्य भ्रमण को तैयार ! साथ ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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