मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
सोमवार, जुलाई 1
पिता की स्मृति में
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पिता की स्मृति में एक आश्रय स्थल होता है पिता बरगद का वृक्ष ज्यों विशाल नहीं रह सके माँ के बिना या नहीं रह सकीं वे बिना आ...
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शुक्रवार, जून 14
सुख उपहार जागरण का है
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सुख उपहार जागरण का है सुख की चादर के पीछे ही छुपे हुए हैं कंटक दुःख के, लोभ किया आटे का जब-जब फंस जाती मछली कांटे में ! ...
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मंगलवार, जून 11
आयी है घर में बहार
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आयी है घर में बहार बात पिछली शताब्दी की है तब इंटरनेट भी नहीं था न मोबाईल सुबह सवेरे बैठ कर रिक्शे पर जाती थी छोटी सी बालिका स्क...
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शुक्रवार, जून 7
एक रास्ता है मन
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एक रास्ता है मन मन मानो भूमि का एक टुकड़ा है उगाने हैं जहाँ उपवन फूलों भरे जहाँ बिन उगाये उग आते हैं खर-पतवार हो सकता है अनज...
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मंगलवार, जून 4
नये घर में
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नये घर में हरा-भरा विशाल बगीचा बिछा है जिसमें कोमल घास का गलीचा सलेटी आकाश से गिरता अमृत सा जल भिगो रहा है कण-कण धरा का बरा...
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सोमवार, जून 3
बरसे नभ से मधुरिम सागर
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बरसे नभ से मधुरिम सागर मचल रहा बाहर आने को ठांठे मारे एक समुन्दर, आतुर है सुवास अनोखी चन्दन वन सी अगन सुलगकर ! नदी बह रही...
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सोमवार, मई 27
इक दिया, कुछ तेल, बाती
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इक दिया, कुछ तेल, बाती खो गया है कोई घर में चलो उसको ढूँढ़ते हैं बह रहा जो मन कहीं भी बांध कोई बाँधते हैं आँधियों की ऊर्ज...
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शनिवार, मई 25
मन राधा बस उसे पुकारे
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मन राधा बस उसे पुकारे झलक रही नन्हें पादप में एक चेतना एक ललक, कहता किस अनाम प्रीतम हित खिल जाऊँ उडाऊं महक ! पंख तौलते ...
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मंगलवार, मई 21
स्वयं ही स्वयं को लिखता पाती
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स्वयं ही स्वयं को लिखता पाती जीवन है सौगात अनोखी माँ का आंचल, पिता का सम्बल, प्रियतम का सुदृढ़ आश्रय वात्सल्य का निर्मल सा जल...
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शुक्रवार, मई 17
मृत्यु एक पड़ाव भर है
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मृत्यु एक पड़ाव भर है जन्म के पीछे छिपी है मृत्यु ज्ञानी तत्क्षण देख रहा है, नई यात्रा पर जाना है मृत्यु एक पड़ाव भर है ! ...
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