मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

मंगलवार, मार्च 31

लौट-लौट आती है प्रतिध्वनि

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लौट-लौट आती है प्रतिध्वनि हर पुकार सुनी जाती है लौट-लौट आती है प्रतिध्वनि हर मनुहार चुनी जाती है ! यूँ ही तो नहीं गगन सज ...
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शुक्रवार, मार्च 27

नेह घट सजाने हैं

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नेह घट सजाने हैं आशा के नहीं आस्था के दीप जलाने हैं आकाश कुसुम नहीं श्रद्धा पुष्प खिलाने हैं, हर लेंगे तम, जो भर देंगे सुवास मन ...
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मंगलवार, मार्च 24

हे !

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हे ! तू ही जाने तेरी महिमा मौन हुआ मन झलक ही पाकर, छायी मधु ऋतु खोया पतझड़ अब न लौटेगा जो जाकर ! रुनझुन गुनगुन गूँजे प्रतिप...
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मंगलवार, मार्च 17

आहट भर पाकर मधु रुत की

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आहट भर पाकर मधु रुत की बासंती चुनरिया ओढ़े हौले हौले से धरती पग, सरकाती पल भर ही घूँघट विस्मय से भर जाता है जग ! आहट...
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शनिवार, मार्च 14

कौन भर रहा प्रीत प्राण में

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कौन भर रहा प्रीत प्राण में कौन सिखाए उड़ना खग को नीड़ बनाना व इतराना, तिरना हौले-हौले नभ में दूर देश से वापस आना ! कौन भर...
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शुक्रवार, मार्च 13

पास आकर दूर जाये

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पास आकर दूर जाये तितलियाँ जो उड़ रही हैं गंध पीतीं रस समोती, रंगे जिसने पर सजीले उस अलख के गीत गातीं ! मौन ही होता मुखर स...
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गुरुवार, मार्च 12

झर जाते फिर जैसे सपने

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झर जाते फिर जैसे सपने है अनोखा खेल उसका,  गूँज प्यारी पंछियों की तिर रहे जो नील नभ में, कूक मनहर कोकिलों की ! सुन सकें तो ह...
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मंगलवार, मार्च 10

धरा गा रही ॐ गीत में

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धरा गा रही ॐ गीत में उसका ही संदेश सुनाते पंछी जाने क्या कह जाते, प्रीत भरे अपने अंतर में वारि भरे मेघ घिर जाते ! मूक...
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सोमवार, मार्च 9

विपासना का अनुभव -अंतिम भाग

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विपासना का अनुभव  सुबह आठ बजे से नौ बजे तक, दोपहर ढाई से साढ़े तीन बजे तक तथा शाम छह से सात बजे तक सामूहिक साधना होती थी. जिसमें सभी...
शनिवार, मार्च 7

विपासना का अनुभव -४

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भोजन के पश्चात एक घंटा विश्राम के लिए था. दोपहर एक बजे से पुनः साधना का क्रम शुरू होता जो दो बजे तक चलता. फिर ढाई से साढ़े तीन बजे तक ...
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शुक्रवार, मार्च 6

विपासना का अनुभव -३

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विपासना का अनुभव  पहले साढ़े तीन दिन श्वास पर ध्यान देने की विधि समझायी गयी, जिसे आना-पान कहते हैं. अगले साढ़े छह दिन विपश्यना का अभ्...
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गुरुवार, मार्च 5

विपासना का अनुभव -२

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विपासना का अनुभव  ठीक छह बजे घंटा बज गया और सभी डाइनिंग हॉल में गये जिसमें तीन ओर दीवारों से सटी हुई सीमेंट की पतली मेजें थीं, जिनप...
बुधवार, मार्च 4

विपासना का अनुभव

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विपासना का अनुभव ग्यारह फरवरी की एक शांत दोपहरी को दो बजे कोलकाता के IIM से सोदपुर स्थित विपासना केंद्र ‘धम्म गंगा’ के लिए रवाना हु...
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मंगलवार, मार्च 3

उससे भी

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उससे भी सागर की अतल गहराई में जहाँ छिपे हैं हजारों मोती जिनकी आभा से जगमगाती है जल नगरी उससे भी चमकदार है तेरा नाम ! ...
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यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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