जीवन
जीवन एक मधुर सुवास सा
चारों ओर बिखरा है
मानव ने खोज ली हैं
हजार तरकीबें उससे बचने की
वह सरल है, सहज प्राप्य है
आदमी जटिल बन गया है
एवरेस्ट पर चढ़ना चाहता है
पड़ोसी के घर का रास्ता उससे तय नहीं होता
जहां सुंदर फूल खिलाए हैं जीवन ने
वह बम बनाकर क्या सिद्ध करना चाहता है
जीवन बिखरा है
प्रकृति का हास बनकर
आदमी ने बंद कर लिए हैं अपने कान
या भर लिए हैं मशीनों की आवाज़ों से
अथवा तेज फूहड़ संगीत से
वह होश खोना चाहता है
जबकि परम होश ही परम आनंद है
जीवन बिखरा है उजास बनकर !
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एवरेस्ट पर चढ़ना चाहता है
जवाब देंहटाएंपड़ोसी के घर का रास्ता उससे तय नहीं होता
विसंगतियो का जाल है - यही तो सवाल है
सटीक .... कन्फ्यूज़्ड आदमी या ये कहे कि अपनी लिप्साओं से घिरा आदमी संसार के रंग देखना तो दूर अपना मन भी नहीं समझ पा रहा। सारगर्भित अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंसादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सुंदर
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