मन पाए विश्राम जहाँ
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अनाम
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सोमवार, जून 30
नीलगगन सा जो असीम है
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नीलगगन सा जो असीम है शब्दों से आहत होता मन शब्दों की सीमा कब जाने, शब्द जहाँ तक जा सकते हैं मात्र वही स्वयं को जाने ! नीलगगन सा जो असीम ह...
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मंगलवार, नवंबर 15
किंतु न जब तक आया मानव
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किंतु न जब तक आया मानव पग-पग पर बलिहारी अंतर कण-कण में छवि सरस समायी, जाने कब तू उतरा नभ से कैसे पावन धरा बनायी ! पाहन, धूलि, पठार जहा...
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