मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

अनाम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अनाम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, जून 30

नीलगगन सा जो असीम है

›
नीलगगन सा जो असीम है शब्दों से आहत होता मन  शब्दों की सीमा कब जाने, शब्द जहाँ तक जा सकते हैं  मात्र वही स्वयं को जाने !  नीलगगन सा जो असीम ह...
13 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, नवंबर 15

किंतु न जब तक आया मानव

›
  किंतु न जब तक आया मानव  पग-पग पर बलिहारी अंतर  कण-कण में छवि सरस समायी,  जाने कब तू उतरा नभ से  कैसे पावन धरा बनायी ! पाहन, धूलि, पठार जहा...
12 टिप्‍पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.