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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
अनिल
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अनिल
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शुक्रवार, जनवरी 29
बहा करो उन्मुक्त पवन सम
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बहा करो उन्मुक्त पवन सम अनल, अनिल, वसुधा, पानी से जीवन का संगीत उपजता, मिले-जुले सब तत्व दे रहे संसृति को अनुपम समरसता ! हर कलुष मिटाती ...
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शनिवार, जनवरी 11
जीवन
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जीवन बरसों बीते जीते जीते जीवन से कब आँख मिलाई, निकट खड़ा वह मुस्काता था दुःख की देते रहे दुहाई ! शब्दों के जंगल में भटके ज्य...
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बुधवार, जून 21
दोराहे हर मोड़ खड़े हैं
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दोराहे हर मोड़ खड़े हैं कहीं प्रज्ज्वलित अग्नि शिखा सी कहीं धुँए से ढकी सुलगती , कहीं सुगंधित अनिल बह रही कहीं घुटन से ...
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रविवार, सितंबर 8
गणेश चतुर्थी पर हार्दिक शुभकामनायें - ऐसा है वह गणराया
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ऐसा है वह गणराया मौन मुखर हो उठा है उसका सदियों से जो चुप बैठा है, इक मुस्कान से उगता सूरज दूजे से चंदा उगता है ! फ...
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