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मंगलवार, मार्च 19

ठिठक गयी कोयल की कूक

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ठिठक गयी कोयल की कूक मुरझाई सी आम्र मंजरी ठिठक गयी कोयल की कूक, जाने कौन निगोड़ी आकर गई कान में उसके फूँक ! कैसे घोले...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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