मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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शुक्रवार, जुलाई 5

जीवन का यह कलश रीतता

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जीवन का यह कलश  रीतता कितना रस्ता चल कर आया  फिर भी कहीं नहीं पहुँचा है,  जाने कब यह राज खुलेगा  मंज़िल पर ही सदा खड़ा है ! एक सुकून उतरता भ...
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बुधवार, सितंबर 13

जाने कब वह घड़ी मिलेगी

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जाने कब वह घड़ी मिलेगी    तुमको ही तुमसे मिलना है  खुला हुआ अविरल मन उपवन,  जब जी चाहे चरण धरो तुम सदा गूंजती मृदु धुन अर्चन...
17 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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