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कलश
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कलश
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शुक्रवार, जुलाई 5
जीवन का यह कलश रीतता
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जीवन का यह कलश रीतता कितना रस्ता चल कर आया फिर भी कहीं नहीं पहुँचा है, जाने कब यह राज खुलेगा मंज़िल पर ही सदा खड़ा है ! एक सुकून उतरता भ...
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बुधवार, सितंबर 13
जाने कब वह घड़ी मिलेगी
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जाने कब वह घड़ी मिलेगी तुमको ही तुमसे मिलना है खुला हुआ अविरल मन उपवन, जब जी चाहे चरण धरो तुम सदा गूंजती मृदु धुन अर्चन...
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