मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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शनिवार, अप्रैल 11

आकर ही रहता है प्रभात

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आकर ही रहता है प्रभात हमें आकाश से उतारा गया  सड़कों से भगाया गया  रेल, बस, कार, साईकिल सभी हुए वर्जित  बाजार, मॉल, थियेटर से...
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सोमवार, जुलाई 4

ऊपर का बंधन तो भ्रम है

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आजादी ! आजादी ! आजादी ! मांग है सबकी आजादी, कीमत देनी पड़ती सबको फिर भी चाहें आजादी ! नन्हा बालक कसमसाता हो मुक्त बाँहों से जाने, किशोर एक...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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