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शुक्रवार, नवंबर 20
प्रेम से कोई उर न खाली
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प्रेम से कोई उर न खाली एक बूंद ही प्रेम अमी की जीवन को रसमय कर देती, एक दृष्टि आत्मीयता की अंतस को सुख से भर देती ! प्र...
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शनिवार, अक्टूबर 3
लुटा रहा वह धार प्रीत की
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लुटा रहा वह धार प्रीत की जीवन के इस महाविटप पर दो खग युगों-युगों से बसते, एक अविचलित सदा प्रफ्फुलित दूजे के पर डोला करते ! लुटा रहा वह...
12 टिप्पणियां:
शुक्रवार, फ़रवरी 24
कभी पवन का झोंका कोई
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कभी पवन का झोंका कोई नीरव दोपहरी में छन-छन किरणें वृक्ष तले सज जातीं, कभी हवा के झोंके संग इक लहराती पत्ती बिछ जाती ! मधु स...
सोमवार, अगस्त 31
एक ही है वह
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एक ही है वह फूल नहीं ‘खिलना’ उसका खग में भी ‘उड़ना’ भाए, जग का ‘होना’ ही सुंदर है ‘बहना’ ही नीर कहलाए ! खिले ‘वही’ पुष्पों ...
2 टिप्पणियां:
शनिवार, मार्च 14
कौन भर रहा प्रीत प्राण में
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कौन भर रहा प्रीत प्राण में कौन सिखाए उड़ना खग को नीड़ बनाना व इतराना, तिरना हौले-हौले नभ में दूर देश से वापस आना ! कौन भर...
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मंगलवार, अगस्त 5
उर उसी पी को पुकारे
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उर उसी पी को पुकारे झिलमिलाते से सितारे झील के जल में निहारें, रात की निस्तब्धता में उर उसी पी को पुकारे ! थिर जल में की...
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