मन पाए विश्राम जहाँ
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गहराई
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गहराई
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रविवार, फ़रवरी 16
गहराई
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गहराई चेतना जुड़ती है जगत में इससे-उससे लोगों, विचारों क्रिया और वस्तुओं से शायद कुछ भरना चाहती है नहीं जानती भीतर अंतहीन गहराई है ज...
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मंगलवार, दिसंबर 17
मन से कुछ बातें
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मन से कुछ बातें मन ! निज गहराई में पा लो, एक विशुद्ध हँसी का कोना बरबस नजर प्यार की डालो बहुत हुआ अब रोना-धोना ! किस अभाव का रोना रोते ...
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बुधवार, अप्रैल 11
भीतर एक यात्रा चलती
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भीतर एक यात्रा चलती जीवन एक सफर है सुंदर चलते ही जाना है नियति, जन्म पूर्व ही शुरू हुआ जो न मृत्यु में भी पूर्णाहुति ! चलते जाना बने सा...
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