मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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सोमवार, सितंबर 28

मौसम का उल्लास समेटे

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मौसम का उल्लास समेटे घन घन घन घन मेघ गरजते टिप टिप टिप टिप झरतीं बूँदें, पारिजात, कंचन, कनेर मिल भीग रहे सरसाएं झूमें ! गगन सलेटी, पवन नश...
शनिवार, अगस्त 25

कैसी थी वह दूरी

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कैसी थी वह दूरी तुमसे दूरी क्या हुई गाज़ हम पे गिर गयी जाने किस बेसुध क्षण में आग दिल में लग गयी वह तो अच्छा हुआ जाना घर तु...
10 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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