मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
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बुधवार, नवंबर 6
भोर के तारे सा छुप जाएगा जग
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भोर के तारे सा छुप जाएगा जग बंद आँखों से जमाना देखते हैं हम कहाँ अक्सर हकीकत देखते हैं चाह की चादर ओढ़ायी थी किसी ने यूँही अपना...
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शनिवार, जनवरी 7
कोई सुन रहा है
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कोई सुन रहा है सुन सके न गर जमाना कोई सुन रहा है बिखरे हुए लफ्जों को वही चुन रहा है दीवाना दिल सजीले जो ख्वाब बुन रहा है ...
2 टिप्पणियां:
मंगलवार, फ़रवरी 11
कुछ बातें दिल से
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कुछ बातें दिल से शिकायतें कर लीं बहुत जमाने से सिर कहीं अब तो झुकाया जाये बोझ ढोयें अच्छाइयों का कब तक चलो औरों को बेहतर बत...
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शुक्रवार, अक्टूबर 18
उसका नाम
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उसका नाम जब कोरा हो मन का पन्ना तभी लिख लो प्रियतम का नाम उस पर नहीं तो जमाना लिख देगा इधर-उधर की इबारतें महत्वाकांक्षा ...
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शुक्रवार, जुलाई 22
कबीरा खड़ा बाजार में
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कबीरा खड़ा बाजार में तन्हा नहीं है कोई जग में जात खुदा की सदा सँग है मौला-मस्त बना फिरता है जिस पर उसका चढ़ा रंग है ! तोड़े...
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