मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
तरंग
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
तरंग
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, सितंबर 9
इच्छाएँ
›
इच्छाएँ इच्छाएँ पत्तों की तरह उगती हैं मन के पेड़ पर कुछ झड़ जाती हैं आरम्भ में ही कुछ बनी रहती हैं देर तक कभी समाप्त नहीं होतीं यह एक...
12 टिप्पणियां:
बुधवार, दिसंबर 28
शब्द तरंग
›
शब्द तरंग तरंग मात्र ही हैं शब्द आते हैं और चले जाते हैं हम ही हैं जो पकड़ लेते हैं उन्हें बीज की तरह और जमा देते हैं मन ...
3 टिप्पणियां:
शुक्रवार, जुलाई 22
कबीरा खड़ा बाजार में
›
कबीरा खड़ा बाजार में तन्हा नहीं है कोई जग में जात खुदा की सदा सँग है मौला-मस्त बना फिरता है जिस पर उसका चढ़ा रंग है ! तोड़े...
11 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें