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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
दरिया
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मंगलवार, जनवरी 8
नये वर्ष में
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नये वर्ष में यूँ तो हर घड़ी नयी है हर पल घटता है पहली बार हर क्षण जन्मता है समय की अनंत कोख में प्रथम और अंतिम बार एक साथ ...
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बुधवार, मार्च 28
एक नगमा जिन्दगी का
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एक नगमा जिन्दगी का एक दरिया या समन्दर बह रहा जो प्रीत बनकर , बाँध मत बाँधें तटों पर उमग जाये छलछलाकर ! एक प्यारी सी हँ...
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शनिवार, जनवरी 21
जल रहा है किन्तु जीवन
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जल रहा है किन्तु जीवन मीठे पानी का इक दरिया निकट ही बस बह रहा है एक कदम ही और चलो मरुस्थल यह कह रहा है अनसुनी कर बात ...
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शुक्रवार, सितंबर 19
यायावर का गीत
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यायावर का गीत जग चलता है अपनी राह उसने लीक छोड़ दी है, है मंजूर अकेले रहना हर जंजीर तोड़ दी है ! सदियों घुट-घुट जीता आया ...
4 टिप्पणियां:
बुधवार, नवंबर 27
उसकी यात्रा
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उसकी यात्रा फिर लौट आया है मन बियाबान जंगलों में बसे गाँव में जहाँ आबादी के नाम पर विचारों के झुंड हैं ऊंचे दरख्तों को ...
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शनिवार, फ़रवरी 9
उसी घड़ी में कुछ घट जाता
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उसी घड़ी में कुछ घट जाता वक्त का दरिया बहता जाता यूँ लगता कुछ कहता जाता ! कल का सूरज कहाँ खो गया आयेगा जो किधर से आये...
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