मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
दिशा
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
दिशा
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, जून 7
हे कृष्ण !
›
हे कृष्ण ! कितना दुर्लभ है इस जग में कोई निर्दोष हास्य निष्कपट अंतर हे कृष्ण ! बहुत ऊँचे मापदंड नहीं बना दिये है तुमने ! यहाँ तो हर म...
2 टिप्पणियां:
शुक्रवार, मई 27
फूल शांति का
›
फूल शांति का झुक जाने में ही विश्राम है सदा मौन में मिलता राम है ‘और चाहिए’ की ज़िद छोड़कर जो मिला है उसे स्वीकार लें विचार सागर की लहरो...
14 टिप्पणियां:
सोमवार, जुलाई 5
जैसे कोई द्वार खुला हो
›
जैसे कोई द्वार खुला हो भीतर-बाहर सभी दिशा में बरस रहा वह झर-झर-झर-झर, पुलक उठाता होश जगाता भरता अनुपम जोश निरंतर ! जैसे कोई द्वार खुला हो ...
14 टिप्पणियां:
मंगलवार, जून 25
गीत कोई कसमसाता
›
गीत कोई कसमसाता नील नभ के पार कोई मंद स्वर में गुनगुनाता , रूह की गहराइयों में गीत कोई कसमसाता ! निर्झरों सा कब बह...
11 टिप्पणियां:
शनिवार, फ़रवरी 16
ऐसा है वह अनंत
›
ऐसा है वह अनंत चादर की तरह लपेट लिया है काँधे पर उसने नीले आकाश को मस्तक पर चाँद की बिंदी लगाये धार लिया है सूरज वक्षस्थल पर ...
1 टिप्पणी:
सोमवार, सितंबर 28
फूल बना हो जैसे बीज
›
फूल बना हो जैसे बीज एक ऊर्जा है अनाम जो खींच रही है अपनी ओर, पता ठिकाना नहीं है जिसका दीवाना जिसका मन मोर ! प्रेम उमगता...
6 टिप्पणियां:
मंगलवार, मार्च 10
धरा गा रही ॐ गीत में
›
धरा गा रही ॐ गीत में उसका ही संदेश सुनाते पंछी जाने क्या कह जाते, प्रीत भरे अपने अंतर में वारि भरे मेघ घिर जाते ! मूक...
4 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें