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गुरुवार, अगस्त 25
कौन फूल खिलने से रोके
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कौन फूल खिलने से रोके बहे न दिल से धार प्रीत की जाने कितने पाहन रोकें, हरियाली उग सकती थी जब कौन फूल खिलने से रोके ! सहज स्पंदित भाव क...
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