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नौका
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नौका
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बुधवार, मई 27
लहरों से थपकी देता है
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लहरों से थपकी देता है कोई सुख का सागर बनकर लहरों से थपकी देता है, हौले-हौले से नौका को मंजिल की झलकी देता है ! बरसे ...
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गुरुवार, फ़रवरी 1
कल जो चाहा आज मिला है
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कल जो चाहा आज मिला है भय खोने का, पाने का सुख मन को डाँवाडोल करेगा, अभय हृदय का, वैरागीपन पंछियों में उड़ान भरेगा ! मंजिल...
13 टिप्पणियां:
शनिवार, अगस्त 30
साझीदार
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साझीदार परमात्मा को हटा दें तो इस जगत में बचता ही क्या है ? उसका ऐश्वर्य ! उसकी विभूतियाँ और अनंत साम्राज्य ! मानव चाहे त...
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शुक्रवार, अप्रैल 11
एक मौन सन्नाटा भीतर
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एक मौन सन्नाटा भीतर सहज कभी था आज जटिल है कृत्य कुंद जब भाव सुप्त है, एक मौन सन्नाटा भीतर हुई शब्दों की धार लुप्त है ! ...
8 टिप्पणियां:
सोमवार, अप्रैल 22
जैसे कोई गीत सुरीला
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जैसे कोई गीत सुरीला शशि, दिनकर नक्षत्र गगन के, धरा, वृक्ष , झोंके पवन के बादल, बरखा, बूंद, फुहारें, पंछी, पुष्प, भ्रमर गुंजार...
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