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बुधवार, फ़रवरी 22
किंतु न जानूँ पथ पनघट का
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किंतु न जानूँ पथ पनघट का पंथ निहारा, राह बुहारी लेकिन तुम आए नहीं श्याम, नयन बिछाए की प्रतीक्षा बीत गए कई आठों याम ! अंतर में संसार भरा थ...
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