मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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शनिवार, फ़रवरी 8

बहने दो

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बहने दो बहने दो पावन रसधार, मत रोको ! झरने दो सजल अश्रुधार, मत टोको माना मन परिचित है बंधन से डरता है अनहद की गुंजन से खिलने दो अन्त...
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बुधवार, मई 23

भाभियाँ

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भाभियाँ माँ की तरह इसरार करके तवे से उतारे ताजे फुलके खिलातीं और सफर हेतु टिफिन पैक कर छोटी सी डिबिया में आम के अचार की ...
18 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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