मन पाए विश्राम जहाँ
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पर्दा
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सोमवार, जनवरी 18
कोई जानता है
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कोई जानता है मन के ‘परदे’ पर यादों की फिल्म चलती है ‘वह’ उसी तरह रहता है अलिप्त जैसे आँख के पर्दे पर चित्र बने अग्नि का तो जलती नहीं न...
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बुधवार, अगस्त 8
खुले आकाश सा
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खुले आकाश सा सवाल बन के जगाये कई रातों को जवाब बनकर एक दिन वही सुलाता है ढूँढने में जिसे बरसों गुजारे वही हर रोज तब ...
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शनिवार, जनवरी 31
एक इल्तजा
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एक इल्तजा दबा न रहे राख में दहकने दो अंगारा मखमली सुर्ख चमकने दो अंगारा, जल जाने दो हर सूं... कि निखर आएगा रूप बरस जाने के ...
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