मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
पलक
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पलक
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मंगलवार, जुलाई 7
उसने अपनी याद जरा सी
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उसने अपनी याद जरा सी जब नयनों में नींद नहीं थी उसका ही तो ख़्वाब बसा था, सुमधुर स्मृतियों के पत्तों से मन का आँगन पूर्ण भरा था ! अधरों प...
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मंगलवार, जनवरी 7
यह तो था अपना ही घर
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यह तो था अपना ही घर पलक बिछाए वह बैठा है दोनों बाहें भी फैलाये, एक कदम उस ओर बढ़ें तो बड़े वेग से वह भी आये ! प्रियतम का...
16 टिप्पणियां:
सोमवार, मई 28
अब जो भी बाधा है पथ में
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अब जो भी बाधा है पथ में तुमको ही तुमसे मिलना है खुला हुआ है मन उपवन, जब जी चाहे चरण धरो तुम सदा गूंजती है धुन अर्चन ! न...
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