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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
पौधा
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पौधा
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शनिवार, मई 30
जन्मदिन की कविता
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जन्मदिन की कविता हे अनाम ! तुझे प्रणाम जाने किस युग में आरम्भ हुई होगी यह यात्रा या अनादि है यह भी तेरी तरह कभी पत्थर,...
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शनिवार, अक्टूबर 13
नहीं अचानक मरता कोई
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नहीं अचानक मरता कोई नव अंकुर ने खोली पलकें घटा मरण जिस घड़ी बीज का, अंकुर भी तब लुप्त हुआ था अस्तित्त्व में आया पौधा ! ...
14 टिप्पणियां:
मंगलवार, जनवरी 17
बीज से फूल तक
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बीज से फूल तक कृषि भवन के विशाल कक्ष में शीशे के जार में बंद एक नन्हा सा बीज था व्याकुल बाहर आने को नयी यात्रा पर जाने को.... खरीदने की म...
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