मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
मन. आसमान
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मन. आसमान
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रविवार, मार्च 22
हम साथ हैं
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हम साथ हैं हमें मिली है मोहलत चन्द दिनों की, चन्द हफ्तों की या चन्द महीनों की हम नहीं जानते पर हम साथ हैं उनके जो लड़ र...
सोमवार, फ़रवरी 17
सोये हैं हम
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सोये हैं हम... बस जरा सी बात इतनी सुख की चादर ओढ़ मन पर खोये हैं हम सोये हैं हम ! एक सागर रौशनी का पास ही कुछ दूर बहत...
10 टिप्पणियां:
सोमवार, अक्टूबर 29
मन की नदी
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मन की नदी श्वास और मौन के दो तटों के मध्य बहती है मन की नदी... जिसे लील जाता है कभी अगाध मरुथल निगल जाता है कभी आसमान जान...
21 टिप्पणियां:
बुधवार, जून 1
मन का क्यों द्वार उढ़का है
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मन का क्यों द्वार उढ़का है खुला आसमां कैद नहीं है बेपर्दा नदिया बहती है, खुलेआम करे छेड़ाखानी हवा किसी से न डरती है ! ब...
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