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राजा
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राजा
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बुधवार, मई 22
राजा
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राजा अनंत ब्रह्मांड में छोड़ दिये गये हैं जिसके द्वारा हम दिशाहीन से, उसके लिये हित अपना साधना है जहाँ लगता है पूरी आज़ादी है लेकिन ए...
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शनिवार, मई 30
जन्मदिन की कविता
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जन्मदिन की कविता हे अनाम ! तुझे प्रणाम जाने किस युग में आरम्भ हुई होगी यह यात्रा या अनादि है यह भी तेरी तरह कभी पत्थर,...
10 टिप्पणियां:
मंगलवार, फ़रवरी 28
कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं
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कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं पानी मथता है संसार बाहर ढूँढ रहा है प्यार, फूल ढूँढने निकला खुशबू मानव ढूँढे जग में सार ! राजा भी यहाँ लगे भिखारी...
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शुक्रवार, अप्रैल 22
कैसा यह गोरख धंधा है
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कैसा यह गोरख धंधा है शासन में गोरख धंधा है हर कोई मांगे चंदा है, "ए राजा’ को महल दिया रोटी को तरसे बंदा है I यहाँ पैसे वाले एक हुए...
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