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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
वरदान
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वरदान
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शुक्रवार, जून 30
चुने राह के कंटक अनगिन
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चुने राह के कंटक अनगिन वरदानों को शाप मानकर रहा खोजता द्वार सुखों का, राह ताकता भटका राही प्रियतम उर से कहीं निकट था ! त...
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मंगलवार, नवंबर 29
मौन
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मौन सिमट गयी है कविता या छोड़ दिया है खजाना शब्दों का उस तट पर मंझदार ही मंझदार है अब दूसरा तट कहीं नजर नहीं आता ए...
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शनिवार, नवंबर 15
तृषा जगाये हृदय अधीर
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तृषा जगाये हृदय अधीर वरदानों की झड़ी लगी है देखो टपके मधुरिम ताप, अनदेखा कोई लिपटा है घुल जाता हर इक संताप ! गूँज रहे खग स...
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मंगलवार, सितंबर 14
तुम हर पल हमें बुलाते हो !
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तुम हर पल हमें बुलाते हो ! जग से जिस पल खाया धोखा जब जब दिल ने खायी ठोकर, तुम ही तो पीड़ा बन मिलते झलक सत्य की दिखलाते हो ! जिनको माना हम...
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