मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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बुधवार, मई 16

एक अजब सी अकुलाहट है

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एक अजब सी अकुलाहट है तन के कण-कण में विद्युत है जहाँ जोड़ दो वह भर देती, इक उलझन भी समाधान भी घोर अँधेरा अथवा ज्योति ! बाहर...
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गुरुवार, अप्रैल 26

दृश्य नहीं वह द्रष्टा है

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दृश्य नहीं वह द्रष्टा है     वह कैद नहीं है मंदिर में दृश्य नहीं वह द्रष्टा है,  नाम-रूप में बंध न सके सृष्टि नहीं वह सृष्टा ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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