मन पाए विश्राम जहाँ
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बुधवार, मई 16
एक अजब सी अकुलाहट है
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एक अजब सी अकुलाहट है तन के कण-कण में विद्युत है जहाँ जोड़ दो वह भर देती, इक उलझन भी समाधान भी घोर अँधेरा अथवा ज्योति ! बाहर...
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गुरुवार, अप्रैल 26
दृश्य नहीं वह द्रष्टा है
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दृश्य नहीं वह द्रष्टा है वह कैद नहीं है मंदिर में दृश्य नहीं वह द्रष्टा है, नाम-रूप में बंध न सके सृष्टि नहीं वह सृष्टा ...
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