मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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मंगलवार, नवंबर 3

निज उजास का करने वितरण

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निज उजास का करने वितरण चिन्मय बसा रहे मेधा में योग्य वरण के एक ईश है, जग यह मोहक रूप धर रहा सुंदर उससे कौन शीश है !   उसे जानना पा...
शुक्रवार, मई 22

‘तू’ ‘मैं’ होकर ही खिलता है

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‘तू’ ‘मैं’ होकर ही खिलता है  ‘मैं’ ‘तू’ होकर ही मिलता है  ‘तू’ ‘मैं’ होकर ही खिलता है,  मन अंतर में यह खेल चले  बाहर इक कण न...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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