मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
शंकर
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शंकर
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गुरुवार, जनवरी 20
हर इक राह सुगम हो जाए
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हर इक राह सुगम हो जाए हर कंटक तेरे पथ का मैं चुन लूँ अपने इन हाथों से, हर इक राह सुगम हो जाए दुआ दे रहा है मन कब से ! अनजाने में पीड़ा ब...
14 टिप्पणियां:
शनिवार, नवंबर 21
देखे वह अव्यक्त छिपा जो
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देखे वह अव्यक्त छिपा जो कंकर-कंकर में है शंकर अणु-अणु में बसते महाविष्णु, ब्रह्म व्याप्त ब्राह्मी सृष्टि में क्यों भयभीत कर रहा विषाणु ! ...
15 टिप्पणियां:
मंगलवार, अक्टूबर 27
हम और अस्तित्व
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हम और अस्तित्व हम वह वृक्ष बन सकें जो हजारों का भला करता है छाँव देता और उनकी क्षुधा हर ता है या बनें बाँसुरी जो खाली है भीतर स...
13 टिप्पणियां:
शुक्रवार, अगस्त 7
जीवन की गागर
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जीवन की गागर बड़ा हो कितना भी सूरज का गोला विशाल हो कितना भी ब्रहमांड अरबों-खरबों हों सितारे गहरे हों सागर या ऊँचें हों पर्वत...
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शनिवार, मार्च 9
महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभकामनाओं सहित
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शम्भो शंकर हे महादेव शूलपाणि, हे गंगाधर, हे महादेव, औघड़ दाता हे त्रिपुरारी, शंकर शम्भो, हे जगनायक, जग के त्राता ! हे शिव...
7 टिप्पणियां:
गुरुवार, दिसंबर 1
नर्तक एक अनोखा देखा
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नर्तक एक अनोखा देखा मुंदी पलक में स्वप्न थिरकते , उपवन - उपवन पुष्प नाचते ! शिशु कोख में माँ में आशा , बीज धरा में उर अभिलाषा , नि...
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