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शहद
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सोमवार, नवंबर 5
हर जगह है हाथ कोई
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हर जगह है हाथ कोई बेसुरी न बांसुरी हो शहद जैसी माधुरी हो, जिंदगी यह कीमती है ज्यों कमल की पाँखुरी हो ! प्रीत सुर भीतर जगे...
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