हर जगह है हाथ कोई
बेसुरी न बांसुरी हो
शहद जैसी माधुरी हो,
जिंदगी यह कीमती है
ज्यों कमल की पाँखुरी हो !
प्रीत सुर भीतर जगे
शांति का उपवन उगे,
बोल जो भी सहज फूटें
चाशनी में हों पगे !
सत्य जब आकार लेगा
सहज सब स्वीकार होगा,
जो थे हम वह ही दिखें
बस यही संदेश देगा !
गूँजता अस्तित्व सारा
ज्योतियों से तमस हारा,
हर जगह है हाथ कोई
राह दे, देकर सहारा !
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