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शुक्रवार, जुलाई 7

शरद की एक शाम

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शरद की एक शाम भीगी-भीगी दूब ओस से हरीतिमा जिसकी मनभाती, शेफाली की मोहक सुवास झींगुर गान संग तिर आती ! शरद काल का नीरव नभ है रिक्त मेघ से, दर...
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सोमवार, अगस्त 19

हरसिंगार के फूल झरे

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हरसिंगार के फूल झरे हौले से उतरे शाखों से बिछे धरा पर श्वेत केसरी हरसिंगार के प्रसून झरे ! रूप-रंग , सुगंध की निधियां ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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