मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
श्रवण
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श्रवण
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शनिवार, जनवरी 22
यहाँ हवाएं भी गाती है
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यहाँ हवाएं भी गाती है सुनना है सुख, पुण्य प्रदायक सुनने की महिमा है अनुपम, करे श्रवण जो बनता साधक मिल जाता इक दिन वह प्रियतम ! निज भाषा ...
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शुक्रवार, दिसंबर 16
दृष्टि धूमिल मोहित है मन
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दृष्टि धूमिल मोहित है मन किसी-किसी दिन झूठ बोलता लगता दर्पण नयन दिखाते वही देखना चाहे जो भी मन ! दृष्टि धूमिल मोहित है मन ...
गुरुवार, अप्रैल 26
दृश्य नहीं वह द्रष्टा है
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दृश्य नहीं वह द्रष्टा है वह कैद नहीं है मंदिर में दृश्य नहीं वह द्रष्टा है, नाम-रूप में बंध न सके सृष्टि नहीं वह सृष्टा ...
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