यहाँ हवाएं भी गाती है
सुनना है सुख, पुण्य प्रदायक
सुनने की महिमा है अनुपम,
करे श्रवण जो बनता साधक
मिल जाता इक दिन वह प्रियतम !
निज भाषा में सुनने का फल
सहज ही हों सभी कर्म कुशल,
अध्ययन वृत्ति, श्रवण है भक्ति
मन की धारा बनती निर्मल !
राग सुनो, आलाप सुनो तुम
मधुरिम तान सुनो कोकिल की,
यहाँ हवाएं भी गाती है
सरिता बहती सुर सरगम की!
कल-कल नदिया की भी सुनना
बादल का तुम सुनना गर्जन,
गुनना पंछी की बोली को ,
सागर की लहरों का तर्जन !
पिउ पपीहा, केकी मोर की
सुनना भी है एक विज्ञान,
गूँज मौन की सुन ले कोई
हृदय गुह में जगता प्रज्ञान !
