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मंगलवार, सितंबर 10
बहा करे संवाद की धार
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बहा करे संवाद की धार टूट गई वह डोर, बँधे थे जिसमें मन के मनके सारे, बिखर गये कई छोर, अति हैं प्यारे से ये रिश्ते सारे ! गिरा धरा पर पेड...
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सोमवार, अगस्त 3
जो शेष रहा अपना होगा
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जो शेष रहा अपना होगा वह बनकर बदली बरस रहा फिर चातक उर क्यों तरस रहा, ले जाये कोई बाँह थाम गर उन चरणों का परस रहा ! जो ...
6 टिप्पणियां:
सोमवार, जून 29
तकनीक और प्रकृति
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तकनीक और प्रकृति रिश्ता निभाने का साधन मान लिया है मोबाइल को, आज की पीढ़ी ने न कागज की छुअन न कलम से दिल का हाल लिखना ज...
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रविवार, फ़रवरी 26
देने वाला देता हर पल
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देने वाला देता हर पल मौन में ही संवाद घट रहा दोनों ओर से प्रेम बंट रहा, एक नशीली भाव दशा है ज्यों चन्द्र से मेघ छंट रहा ! एक अचलता पर्वत ...
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सोमवार, जनवरी 30
बेगानी है हरी दूब भी
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बेगानी है हरी दूब भी मरुथल बियाबान के वासी फूलों से रहते अनजाने, बूंद-बूंद को जो तरसे हैं नदियों से रहते बेगाने ! स्वप्न सरीखे उनको लगते ...
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