मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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सोमवार, जुलाई 18

जब याद कमल सर खिलता है

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जब याद कमल सर खिलता है तू हर उस पल में मिलता है  जब याद कमल सर खिलता है,  नहीं अतीत न भावी में ही  दर्पण दर्शन का मिलता है ! मन जो नित भागा ...
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मंगलवार, जून 16

अनगाया यदि रहा गीत

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अनगाया यदि रहा गीत  अनगाया यदि रहा गीत जो  गाने आये थे हम भू पर,  खिला नहीं यदि सरसिज उर में  मिले नहीं उड़ने को दो पर ! ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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