मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

सलिल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सलिल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, नवंबर 9

सब घटता है सहज यहाँ

›
सब घटता है सहज यहाँ रात ढली, दिन उगा बोलो किसको श्रम हुआ, हवा बही सुरभि लिए बोलो किसने दाम दिए ! शिशु जन्मा, पांव चला क...
17 टिप्‍पणियां:
रविवार, जुलाई 1

खाली मन का कोरा पन्ना

›
खाली मन का कोरा पन्ना खाली है मन बिल्कुल खाली सर-सर जिसमें हवा गुजरती, कभी अनल बन लपट सुलगती नहर विमल सलिल की बहती ! मधुर...
12 टिप्‍पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.