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सुर
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गुरुवार, अप्रैल 21
कविता
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कविता भला किससे है कविता की महक और मिठास शब्दों के सुमधुर जाल से या भावों के सुर और ताल से कभी ढूँढे नहीं मिलते शब्द पर भीतर घन बन उ...
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बुधवार, मार्च 27
दूर कोई गा रहा है
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दूर कोई गा रहा है कौन जाने आस किसकी किस बहाने आँख ठिठकी प्रीत की गागर बना दिल बेवजह छलका रहा है ! चढ़ हवाओं के प...
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सोमवार, सितंबर 18
एक कलश मस्ती का जैसे
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एक कलश मस्ती का जैसे बरस रहा सावन मधु बन कर या मदिर चाँदनी मृगांक की, एक कलश मस्ती का जैसे भर सुवास किसी मृदु छंद की ! ...
11 टिप्पणियां:
बुधवार, अगस्त 13
उसने भी कर दिया इशारा
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उसने भी कर दिया इशारा रंग हमारे हाथ लगे हैं कैनवास है यह जग सारा, रंगी इसे बना डालें अब उसने भी कर दिया इशारा ! कोई गीत रचे ...
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मंगलवार, जून 21
विश्व संगीत दिवस पर शुभकामनाएँ
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संगीत प्राणों में नव रस भर, मिठास संगीत भरे स्वर लहरी गुंजित हो, प्रमुदित उर सबके करे ! रसवंती धार बहे, श्रवणों को सार मिले सुर में जब गी...
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