मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
aastha
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
aastha
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, फ़रवरी 21
दुलियाजान में रामदेव जी
›
दुलियाजान में रामदेव जी हे युगपुरुष ! हे युग निर्माता ! हे नव भारत भाग्य विधाता ! हे योगी ! सुख, प्रेम प्रदाता तुम उद्धारक, हे दुःख त्राता ...
2 टिप्पणियां:
गुरुवार, फ़रवरी 17
बस यह अंतिम प्रयास हो
›
बस यह अंतिम प्रयास हो जल जाये, हमारी अशुभ कर्मों की वासना जल जाये तुम्हारे ज्ञान के धूमकेतु से शेष न रहे, कोई अशुभ संस्कार कर्म कोई, न बने...
6 टिप्पणियां:
बुधवार, फ़रवरी 9
आत्मा का वस्त्र
›
आत्मा का वस्त्र वह ठंड से कांप रही थी सिकुड रही थी, ठिठुर रही थी उस दिन मैंने उसे बर्फीले बियाबान में सिसकते देखा, याद है मुझे उस दिन मैंने...
2 टिप्पणियां:
बुधवार, दिसंबर 15
नव गीत जब रचने को है
›
नव गीत जब रचने को है कैद पाखी क्यों रहे जब आसमां उड़ने को है, सर्द आहें क्यों भरे नव गीत जब रचने को है ! सामने बहती नदी ताल बन कर क्यों ...
4 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें