मन पाए विश्राम जहाँ
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hasy
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गुरुवार, फ़रवरी 10
हँसना मना है
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ए जी,खायेंगे न ? “ए जी, चलेंगे न” की जब श्रीमती ने लगाई पांचवी बार गुहार तो झकमार, जूता पहन, श्रीमान हो गए सांध्य भ्रमण को तैयार ! साथ ...
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बुधवार, फ़रवरी 2
कुछ इधर की कुछ उधर की
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कुछ इधर की कुछ उधर की लोकतंत्र लोकतंत्र का हुजूर असल अर्थ है यही लोग अपने हों यदि, तन्त्र अपना हो गया ! जान पहचान के हैं हजार फायदे अर्जिय...
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