मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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शुक्रवार, फ़रवरी 11

चलन दुनिया का

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चलन दुनिया का   जग का पहिया झूठ से चलता   भागे कोसों सच से डरता,   सदा मुखौटा ओढ़े रहता पाखंडों पर ही यह पलता ! जाने किसका मह...
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बुधवार, जनवरी 19

सच की दुनिया कोमल कितनी !

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सच की दुनिया कोमल कितनी ! छा जाये जब सघन अँधेरा हाथ  हाथ को  भी ना सूझे, राह नजर ना आये कोई हाले दिल कोई ना बूझे ! भीतर का...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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