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sach
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शुक्रवार, फ़रवरी 11
चलन दुनिया का
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चलन दुनिया का जग का पहिया झूठ से चलता भागे कोसों सच से डरता, सदा मुखौटा ओढ़े रहता पाखंडों पर ही यह पलता ! जाने किसका मह...
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बुधवार, जनवरी 19
सच की दुनिया कोमल कितनी !
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सच की दुनिया कोमल कितनी ! छा जाये जब सघन अँधेरा हाथ हाथ को भी ना सूझे, राह नजर ना आये कोई हाले दिल कोई ना बूझे ! भीतर का...
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