मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
मंगलवार, मार्च 29
भारत
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भारत शांति का संदेश दे रहा जो भारत सारी दुनिया को स्वयं अशांत क्यों हो बैठा ? प्रीत की डोर से बांधा जिसने दुनिया के हर कोन...
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शुक्रवार, मार्च 18
थोड़ी सी हँसी
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थोड़ी सी हँसी फूल क्या लुटाते हैं ? इतना जो भाते हैं थोडा सा रंग.. गंध थोड़ी सी और ढेर सारी खिलावट ! नहीं उनके होने में जरा ...
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गुरुवार, मार्च 3
सुख-दुःख
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सुख-दुःख एक को लिया तो दूसरा पीछे आने ही वाला है चाहा सुख को तो दुःख को गले लगाना ही है पार हुआ जो मन दोनों से उसने ही यह रा...
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बुधवार, मार्च 2
होना भर यदि क़ुबूल हो
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होना भर यदि क़ुबूल हो दुःख के कांटे यदि नहीं चाहिये तो सुख के फूल कैसे खिलेंगे पतवार खेने का श्रम उठाया नहीं तो पार भला कैसे उ...
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सोमवार, फ़रवरी 29
जहाँ नाचने को जग सारा
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जहाँ नाचने को जग सारा जीवन एक ऊर्जा अनुपम पल-पल नूतन होती जाती, नव छंद, नव ताल सीख लें नव सुर में नवगीत सुनाती ! इस पल...
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गुरुवार, फ़रवरी 25
उसका साथ
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उसका साथ एक अदृश्य हाथ सदा थामे रहता बढ़ो, तुम आगे बढ़ो ! कोमल स्पर्श उसका, सहला जाता छालों को पावों के स्मृति का आँचल...
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बुधवार, फ़रवरी 10
आया बसंत
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आया बसंत सरसों के पीले फूलों पर गुनगुन गाते डोल रहे हैं, मतवाले मदमस्त भ्रमर ये कौन सी भाषा बोल रहे हैं ? पात झरे भई...
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सोमवार, फ़रवरी 8
उसका मिलना
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उसका मिलना याद आता है कभी ? माँ का वह रेशमी आंचल छुअन जिसकी सहला भर जाती थी अँगुलियों के पोरों को भर जाता था मन आश्वस्ति...
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बुधवार, जनवरी 27
किसने रोका है पथ अपना
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किसने रोका है पथ अपना वैसे ही हो जाते हैं हम जैसा होना सदा चाहते, फूलों से खिल सकते इस क्षण नेह सुवास यदि बिखराते ! स्रो...
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गुरुवार, जनवरी 14
लोहित के पार ( अंतिम भाग )
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३१ दिसम्बर २०१५ शाम के पांच बजे हैं. हम अभी-अभी अपने कैम्प में आये हैं. बेंत की चटाइयों से बनी दीवारों वाला यह कमरा आज की रात भी हमा...
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मंगलवार, जनवरी 12
लोहित के पार
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अरुणाचल प्रदेश के रोइंग जिले का ‘मिशिमी हिल कैम्प’ दो दिनों के लिए हमारा घर बन गया है. जिसे श्री पुलू चलाते हैं. इस प्रदेश की यह हमारी ...
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मंगलवार, जनवरी 5
नये वर्ष में
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नये वर्ष में ...क्यों न प्रवेश करें नये आयामों में पुराने वक्तों को उतार फेंके ज्यों केंचुल उतार देता है सर्प ! जो किया है अब ...
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