मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

मंगलवार, मई 4

चेतन भीतर जो सोया है

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चेतन भीतर जो सोया है बीज आवरण को ज्यों भेदे   धरती को भेदे ज्यों अंकुर,  चेतन भीतर जो सोया है  पुष्पित होने को है आतुर ! चट्टानों को काट उमड़...
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सोमवार, मई 3

टूटते ख्वाब

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टूटते ख्वाब महसूस करें तो दुख बहुत है बाहर  भीतर कुछ और क्यों बनाया जाए  गुजर जाएगा वक्त ही है आखिर यह  बुरा कहकर क्यों खुद को सताया जाए  लग...
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रविवार, मई 2

मन निर्मल इक दर्पण हो

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मन निर्मल इक दर्पण हो लंबी गहरी श्वास भरें  वायरस का विनाश करें,  प्राणायाम, योग अपना  अंतर में विश्वास धरें ! उष्ण नीर का सेवन हो  उच्च सदा...
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शुक्रवार, अप्रैल 30

घड़ी विचित्र यह दौर अनोखा

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घड़ी विचित्र यह दौर अनोखा जूझ रहा है देश आजकल  जिस विपदा से वह है भारी, तुच्छ हुई है सम्मुख उसके  जो कुछ भी की थी तैयारी ! हैं प्रकृति के निय...
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मंगलवार, अप्रैल 27

पावन परिमल पुष्प सरीखा

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पावन परिमल पुष्प सरीखा एक चेतना! चिंगारी हूँ एक ऊर्जा सदा बहे जो, सत्य एक धर रूप हजारों परम सत्य के संग रहे जो ! अविरत गतिमय ज्योतिपुंज हूँ ...
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सोमवार, अप्रैल 26

रहमतें बरसती हैं

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  रहमतें बरसती हैं करें क़ुबूल सारे गुनाहों को हम अगर रहमतें बरसती हैं, धुल ही जायेंगे  हरेक शै अपनी कीमत यहाँ माँगे   भला कब तक चुकाने से बच...
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शनिवार, अप्रैल 24

वासन्ती प्रभात

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  वासन्ती प्रभात  जन्म और मृत्यु के मध्य  बाँध लेते हैं हम कुछ बंधन जो खींचते हैं पुनः इस भू पर  भूमिपुत्र बनकर न जाने कितनी बार बंधे हैं  अ...
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शुक्रवार, अप्रैल 23

दीप आरती का जब जगमग

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दीप आरती का जब जगमग छायाओं के पीछे भागे  जब सच से ही मुख मोड़ लिया,  जीवन का जो सहज स्रोत था   शुभ नाता उससे तोड़ लिया ! अर्ध्य चढ़ाते थे रवि क...
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बुधवार, अप्रैल 21

राम की छवियाँ जो हर मन में बसी हैं

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  राम की छवियाँ जो हर मन में बसी हैं  पैरों में पैजनियां पहने  घुटनों-घुटनों चलते राम,  माँ हाथों में लिए कटोरी आगे आगे दौड़ते  राम ! गुरुकुल...
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मंगलवार, अप्रैल 20

मत लगाना दिल यहां पर

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मत लगाना दिल यहां पर  ख्वाब है यह जिंदगी इक  यह सुना है, मत लगाना दिल यहां पर  यह गुना है ! आएगी इक बाढ़ जैसी  महामारी,  था अंदेशा कुछ दिलों ...
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सोमवार, अप्रैल 19

ज्यों धूप और पानी

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ज्यों धूप और पानी   दिल में लरजता जो है   रग-रग में कम्प भरता,   वह भिगो रहा अहर्निश  जो लौ को ओट देता ! सम्भालता सदा है  पल भर न साथ छोड़े, ...
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रविवार, अप्रैल 18

श्वासें

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श्वासें  गा रही हैं नाम   जिसे हम सुन नहीं पाते  या कर देते हैं सुनकर भी अनसुना  श्वासें कीमती हैं कितनी  यह बात सिखा रहा है एक वायरस आज  चे...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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