मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
सोमवार, नवंबर 28
सदा पुकारे जाता था वह
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सदा पुकारे जाता था वह बढ़े हाथ को थामा जिसने पग-पग में जो सम्बल भरता, वही परम हो लक्ष्य हमारा अर्थवान जीवन को करता ! जन्मों से जो ...
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शुक्रवार, नवंबर 25
हीरा मन
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हीरा मन अँधेरे में टटोले कोई और हीरा हाथ लगे जो अभी तराशा नहीं गया है पत्थर और उसमें नहीं है कोई भेद ऐसा ही है मानव का मन वही अनगढ़ ही...
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गुरुवार, नवंबर 24
स्वप्न भारत का
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स्वप्न भारत का काश ! रशिया को भी सदस्यता देने को राजी हो जाये नाटो और बाइडेन गले लगा लें पुतिन को चाइना ताइवान को आँख दिखाना बंद करे और ...
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बुधवार, नवंबर 23
उस भली सी इक ललक को
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उस भली सी इक ललक को जिस घड़ी आ जाये होश जिंदगी से रूबरू हों, उसी पल में ठहर कर फिर झांक लें खुद के नयन में ! बह रही जो खिलखिलाती गुनग...
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रविवार, नवंबर 20
एक पुकार मिलन की जागे
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एक पुकार मिलन की जागे तू ही मार्ग, मुसाफिर भी तू तू ही पथ के कंटक बनता, तू ही लक्ष्य यात्रा का है फिर क्यों खुद का रोके रस्ता ! मस्ती की नदि...
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शुक्रवार, नवंबर 18
यूँ ही कुछ ख़्याल
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यूँ ही कुछ ख़्याल दिल की गहराइयों में छिपा है जो राज वह शब्दों में आता नहीं जो ऊपर-ऊपर है वह सब जानते ही हैं उसे कविता में कहा जाता नहीं...
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मंगलवार, नवंबर 15
किंतु न जब तक आया मानव
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किंतु न जब तक आया मानव पग-पग पर बलिहारी अंतर कण-कण में छवि सरस समायी, जाने कब तू उतरा नभ से कैसे पावन धरा बनायी ! पाहन, धूलि, पठार जहा...
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रविवार, नवंबर 13
जो जीवन हँसता था जग में
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जो जीवन हँसता था जग में कल डोल रहा था खुशियों में अब गम की चादर ओढ़ी है, हर सुख के पीछे दुःख आता यह खूब बनायी जोड़ी है ! जब बादल से नभ ढ...
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शुक्रवार, नवंबर 11
अब तो इक ही धुन बजती है
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अब तो इक ही धुन बजती है अब जब तुम हो साथ हमारे खोज रहे तब भला किसे हम, श्वासों में हो, प्राणों में तुम ढूँढे भला किसे नादां मन ! वाणी ...
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बुधवार, नवंबर 9
भारत
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भारत ‘देने’ को कुछ न रहा हो शेष जब आदमी के पास तब कितना निरीह होता है वह देना ही उसे आदमी बनाये रखता है मांगना मरण समान है खो जाता जिस...
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मंगलवार, नवंबर 8
चाह या अनुभव
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चाह या अनुभव चाह यानी इच्छा या कामना ! मोहित कर लेती है आत्मा को जुट जाती है जो उसे पूर्ण करने के प्रयास में ! हाथ लगता है एक और अनुभव औ...
शनिवार, नवंबर 5
धरती
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धरती धरती माँ है माँ की तरह धरती है अपनी कोख में संतति हज़ारों सूक्ष्म जीव कीट, मीन, तितलियाँ, पशु-पंछी वन-जंगल और ‘मानव’ को भी जो घाय...
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गुरुवार, नवंबर 3
तुम नाम हो इस क्षण
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तुम नाम हो इस क्षण अभय कर देती है तुम्हारी मौन वाणी शक्ति व ऊर्जा से कर आप्लावित कदमों में संबल भरती वही हर मुस्कान का स्रोत है अंधकार...
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