मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

बुधवार, अप्रैल 26

कविता खो गई है !

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कविता खो गई है ! प्रेम नहीं बचेगा जब जीवन में  कविता खो जाएगी  काव्य प्रेम का प्रस्फुटन है  तुलसी, सूर, कबीर, नानक  या मीरा हो  प्रेम के मार...
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शनिवार, अप्रैल 22

उर नवनीत चुराने वाला

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उर नवनीत चुराने वाला  श्वासों का उपहार मिला है  जीवन की हर घड़ी  अनमोल,  प्रेम छुपा हर इक अंतर में   कृष्ण  की गीता के हैं बोल ! मेरा ही बन,...
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बुधवार, अप्रैल 19

श्वास-श्वास में सिमरन हो जब

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श्वास-श्वास में सिमरन हो जब श्वासों में मत भरें सिसकियाँ  हैं सीमित उपहार किसी का,  दीर्घ, अकंपित अविरत  गति हो  इनमें कोई राज है छुपा ! श्व...
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रविवार, अप्रैल 16

पलकों में है बंद ख़्वाब इक

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पलकों में है बंद ख़्वाब इक  झर-झर झरता बादल नभ से  सम्मुख दरिया भी बहता है, सब कुछ पाकर भी इस दिल का  प्याला ख़ाली ही रहता है ! जाने किसको ढ...
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शनिवार, अप्रैल 15

एक सच

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सच  छिपा होता है  सच स्वप्नों में भी  और  दिखाई दे जाता है झूठ हक़ीक़त में कभी    कितना सच है स्वप्न मृत्यु का क्योंकि अवश्यंभावी है वह  और ...
शुक्रवार, अप्रैल 14

आये पर्व अनोखे

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आये पर्व अनोखे जब बजे ढोल, नाचते  कृषक झूमी फसलें, ह्रदय में पुलक !  ‘नब बर्ष’   बंगाल में आये ‘पुत्तांडु’ सभी तमिल मनायें ! केरल में पावन ...
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बुधवार, अप्रैल 12

एक प्यास जो अंतहीन है

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एक प्यास जो अंतहीन है एक ललक अम्बर  छूने की  एक लगन उससे मिलने की,  एक प्यास जो अंतहीन है  एक आस खुद के खिलने की ! सत्य अनुपम मन गगन समान  उ...
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शनिवार, अप्रैल 8

मिलन

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मिलन  एक कदम बढ़ाओ तो   वह हज़ार कदमों से चलकर आता है  आवाज़ लगाने भर की देर है  भेज देता है देवदूत सा कोई जन  जिसका सान्निध्य  शीतल जल और अ...
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गुरुवार, अप्रैल 6

अमिलन

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अमिलन लाख मिलाएँ  शक्कर और रेत  जैसे नहीं मिलते  आत्मा और देह वैसे ही हैं  अंतत: शक्कर भी  परमाणुओं से बनी है  रेत की तरह  देह भी बनी है  उ...
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मंगलवार, अप्रैल 4

मन - छाया

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मन - छाया छायाओं से लड़कर कोई  जीत सका है भला आजतक  सारी कश्मकश  छायाएँ ही तो हैं  उनके परिणामों से बंधे  हम जन्म-जन्म गँवा देते हैं  ज़रूरत...
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शनिवार, अप्रैल 1

आनंदित है कण-कण जड़ का

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आनंदित है कण-कण जड़ का  निशदिन मेघ प्रीत का तेरी  बरस रहा है झर-झर झर-झर,  ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ  दसों दिशाओं  से नित आकर ! जिस पल बनी पदार्थ ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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