मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

शनिवार, जून 29

एक खुला आसमान

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एक खुला आसमान  पहुँचे नहीं कहीं मगर, हल्के हुए ज़रूर  मनों ने हमारे, कई बोझे उतारे हैं   बाँध कर रखा जिन्हें  था, खोने के त्रास से  मुक्त कि...
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बुधवार, जून 26

प्रेम

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प्रेम    बाँटने से बढ़ता है प्रेम  भीतर भरा है प्रेम का जो स्रोत उसे लुटाने का  अवसर ही जीवन है  बन जाता तब तुम्हारा मन ईश्वर का आँगन है  वह...
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रविवार, जून 23

सत्य

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सत्य  ‘मैं’ तुममें विलीन हो जाये  यही चाह होती है प्रेम की  यही चाह लघु मन की है  जो विशाल मन में डुबाना चाहता है ख़ुद को  अनंत में खोकर अपन...
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शुक्रवार, जून 21

वही चेतना वही बोध है

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वही चेतना वही बोध है चिन्मय बसा रहे मेधा में योग्य वरण के एक ईश है, जग यह मोहक रूप धर रहा सुंदर उससे कौन शीश है !   उसे जानना पाना उसको हो श...
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मंगलवार, जून 18

हम आत्मदेश के वासी हैं

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हम आत्मदेश के वासी हैं  भीतर एक ज्योति जलती है  जो तूफ़ानों में भी अकंप,  तन थकता जब मन सो जाता जगा रहता आत्मा निष्कंप ! तन शिथिल हुआ मन दृढ...
शनिवार, जून 15

जीवन रहे बुलाता हर पल

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जीवन रहे  बुलाता हर पल ​​भीतर इक संसार दूसरा  शायद  यह जग कभी न जाने,  इस जीवन में राज छिपे हैं  लगे सभी हैं जिन्हें छिपाने ! लेकिन इसी अँधे...
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बुधवार, जून 12

सुख खिलता सदा उजालों में

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सुख खिलता सदा उजालों में ​​उलझ-पुलझ अंतर रह जाता   अपने ही बनाये जालों में,  जो भी चाहा वह मिला बहुत  खो  डाला किन्हीं ख़्यालों में ! तम की ...
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सोमवार, जून 10

सभी दलों से देश बड़ा है

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सभी दलों से देश बड़ा है  लोकतंत्र की विजय हुई है  हारे-जीततें होंगे लोग,  देश समन्वय के रस्ते  पर  आश्वासित हुए सारे लोग ! तय कर दिया चुनावो...
शुक्रवार, जून 7

एक कतरा प्रेम

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एक कतरा प्रेम  बचपन में हम झगड़ते हैं  यौवन में कुछ न कुछ पकड़ते हैं  वह तो बाद में पता चलता है  हक़ीक़त में जिसकी तलाश है  वह न झगड़ने से म...
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बुधवार, जून 5

अब चलो, पर्यावरण की बात सुनें

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अब चलो, पर्यावरण  की बात सुनें  ख़त्म हुई चुनाव की गहमा गहमी  अब चलो, पर्यावरण  की बात सुनें  सूखते जलाशयों पर नज़र डालें  कहीं झुलसती धरती ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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